माणिक्य रत्न राशि व लग्न के अनुसार धारण करने कि विधि call-9643992242

माणिक्य रत्न राशि व लग्न के अनुसार धारण करने कि विधि-
मेष राशि :– मेष राशि मंगल की राशि है. मेष राशि का व्यक्ति बुद्धि बल प्राप्त करने आत्मोन्नति, सन्तान सुख, प्रसिद्धि, राज्य कृपा के लिए माणिक्य धारण कर सकता है. सूर्य की महादशा में माणिक्य श्रेष्ठ फलदायक होता है.
वृष राशि :– इस राशि के व्यक्ति को माणिक्य नहीं धारण करना चाहिए. क्योंकि यह रत्न वृष राशि के व्यक्ति के लिए सूर्य की महादशा, अंतर्दशा आदि गोचर में अशुभ फल देगा.
मिथुन राशि :– मिथुन राशि के व्यक्ति को माणिक्य रत्न सिर्फ सूर्य की दशा में ही धारण करना चाहिए वैसे कभी भी धारण नहीं करना चाहिए.
कर्क राशि :- इस राशि के व्यक्ति को माणिक्य रत्न धारण करना चाहिए. यह धन के अभाव को दूर करने में सहायक होगा. तथा आंखों के कष्ट में भी लाभकारी होगा.
सिंह राशि :– इस राशि के व्यक्ति को माणिक्य अवश्य धारण करना चाहिए. शुभ फलदायक होगा. इस राशि वाले को जीवन भर माणिक्य लाभ ही लाभ प्रदान करेगा. इसे धारण करने से शत्रुओ पर विजय भी मिलती है. व मानसिक संतुलन बना रहता है. शारीरिक स्वास्थ तथा आत्मबल मिलता है.
कन्या राशि :– उस राशि वालो को माणिक्य सदैव हानिकारक व कष्टकारी होगा. भयंकर दुर्घटना व नेत्र विकार से पीड़ित होने की संभावना बनी रहेगी.
तुला राशि :– इस राशि वाले को केवल सूर्य की दशा में ही माणिक्य धारण करना चाहिए, जो कि लाभ के लिए शुभ होगा.
वृश्चिक राशि :– इस राशि के व्यक्ति को माणिक्य धारण करना चाहिए क्योंकि यह राशि मंगल की है अत: धारण करने से राज्य कृपा, प्रतिष्ठा, नौकरी में सफलता प्राप्त होगी.
धनु राशि :– इस राशि वाले को माणिक्य धारण करना शुभ होगा यह भाग्य की वृद्धि में सहायक होगा.
मकर राशि :– इस राशि वाले को भूल कर भी मानिक्या नहीं धारण करना चाहिए. क्योंकि यह उसे शारीरिक कष्ट, रोग दुर्घटना आदि परेशानी दे सकता है.
कुम्भ राशि :– ऐसे व्यक्ति को माणिक्य पहनना तो क्या इससे दूर दूर रहना चाहिए. वरना भारी हानि करेगा. पति या पत्नी दोनों के लिए हानिकारक रहेगा.
मीन राशि :– इस राशि के व्यक्ति माणिक्य अपनी दशा सूर्य की दशा में धारण कर सकते है. जो रोगों से छुटकारा दिलवाने में सहायक सिद्ध होगा .
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मोती रत्न राशि व लग्न के अनुसार धारण करने कि विधि Call- 9643992242

मोती रत्न राशि व लग्न के अनुसार धारण करने कि विधि-
मेष राशि :– इस राशि के व्यक्ति यदि मोती धारण करते है तो उन्हें मानसिक शान्ति, विद्या सुख, गृह सुख और मातृ सुख का भरपूर लाभ मिलता है. यदि मोती को मंगल के रत्न मूंगा के साथ धारण किया जाये तो विशेष धन का लाभ होने लगता है.
वृष राशि :– इस राशि के व्यक्ति को मोती कभी भी धारण नहीं करना चाहिए. यह शुभ फलदायक नहीं है.
मिथुन राशि :– इस राशि के व्यक्ति को विशेष परिस्थितियों में मोती धारण करना लाभदायक हो सकता है. चन्द्रमा की दशा में मोती धारण करे तो उन्हें आर्थिक लाभ हो सकता है. मिथुन के लिए चन्द्रमा अशुभ भी है. इसे किसी ज्योतिषी से परामर्श करके धारण करें.
कर्क राशि :- इस राशि के व्यक्ति के लिए मोती अति शुभ कारक रहेगा. मोती धारण करने से स्वास्थ्य तथा आर्थिक पहलू पर नियंत्रण रहेगा. इनके जीवन में विनम्रता बनाए रखने में सक्षम होगा. आर्थिक दृष्टिकोण से लाभकारी होगा.
सिंह राशि :– इस राशि का व्यक्ति मोती धारण कर सकता है. आंखों के रोगों को दूर करेगा. रक्त सम्बंधित रोगों को दूर करेगा. धन में वृद्धि करेगा. पिता को मानसिक शान्ति प्रदान करेगा. नींद अच्छी आएगी. पुत्र को मृत्यु से बचायेगा.
कन्या राशि :– इस राशि व्यक्ति यदि मोती धारण करे तो आर्थिक लाभ, यश प्राप्ति, सन्तान का सुख प्राप्त होगा. तथा कल्याणकारी साबित होगा.
तुला राशि :– इस राशि के व्यक्ति के लिए मोती धारण करना शुभ्ताथा लाभकारी भी है. मोती धारण करने से राज्य कृपा, अचानक धन प्राप्त, यश, पद-प्रतिष्ठा तथा समाज का गौरव प्राप्त होगा.
वृश्चिक राशि :– इस राशि वालो के लिए मोती धारण करना अति लाभकारी है. इसके प्रभाव से चमत्कारिक रूप से भाग्य में उन्नति, धार्मिक भावना प्रबल होगी. जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में वह सुख का अनुभव करेगा.
धनु राशि :– मोती धारण करना इस राशि वालो के लिए अति अशुभ होगा. इसका कारण मोती चन्द्रमा के बल को बढ़ाएगा जी इस राशि वालो के लिए हानि कारक सिद्ध होगा.
मकर राशि :– इस राशि वालो के लिए अपने जीवन काल में मोती कभी भी धारण नहीं करना चाहिए. स्वास्थ्य हानि तथा पति- पत्नी में वैमनस्यता बढ़ेगी.
कुम्भ राशि :– इस राशि के लोगों को मोती धारण नहीं करना चाहिए क्योंकि यह धन, यश, संपत्ति को नष्ट करेगा. अचानक शत्रु बढ़ेगे.
मीन राशि :– इस राशि के व्यक्ति को मोती अवश्य धारण करना चाहिए वह उसे सदैव यश प्रदान करेगा. बुद्धि लाभ, भाग्य उदय, विद्या की प्राप्ति, पुत्र के सुख की प्राप्ति व अन्य चमत्कारी लाभ देगा.
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दक्षिणावर्ती शंख, विष्णु शंख Call- 9643992242

यह विष्णु शंख लक्ष्मी प्राप्ति, आर्थिक उन्नति, व्यापार वृद्धि आदि में भी विशेष रूप से सहायक है कर्जा उतारने में तो यह प्रयोग अत्याधिक महत्वपूर्ण एवं प्रभाव युक्त है। जो व्यक्ति इस प्रकार का प्रयोग चाहता है या अपने जीवन में पूर्ण आर्थिक उन्नति एवं व्यापार वृद्धि चाहता है, उसे यह प्रयोग अवश्य करना चाहिये।
दक्षिणावर्ती शंख देवी लक्ष्मी के स्वरुप को दर्शाता है. दक्षिणावर्ती शंख ऎश्वर्य एवं समृद्धि का प्रतीक है. इस शंख का पूजन एवं ध्यान व्यक्ति को धन संपदा से संपन्न बनाता है. व्यवसाय में सफलता दिलाता है, इस शंख में जल भर कर सूर्य को जल चढाने से नेत्र संबंधि रोगों से मुक्ति प्राप्त होती है तथा रात्रि में इस शंख में जल भर कर सुबह इसके जल को संपूर्ण घर में छिड़कने से सुख शंति बनी रहती है तथा कोई भी बाधा परेशान नहीं करती.
दक्षिणावर्ती शंख मुख बंद होता है इसलिए यह शंख बजाया नहीं जाता केवल पूजा कार्य में ही इसका उपयोग होता है इस शंख के कई लाभ देखे जा सकते हैं.
दक्षिणावर्ती शंख बहुत पवित्र, विष्णु-प्रिय और लक्ष्मी सहोदर माना जाता है, यदि घर में दक्षिणावर्ती शंख रहता है तो श्री-समृद्धि सदैव बनी रहती है. इस शंख को घर पर रखने से दुस्वप्नों से मुक्ति मिलती है. इस शंख को व्यापार स्थल पर रखने से व्यापार में वृद्धि होती है. पारिवारिक वातावरण शांत बनता है.


“ऊँ ह्रीं श्रीं नम: श्रीधरकरस्थाय पयोनिधिजातायं
लक्ष्मीसहोदराय फलप्रदाय फलप्रदाय
श्री दक्षिणावर्त्त शंखाय श्रीं ह्रीं नम:।”


दक्षिणावर्ती शंख को स्थापित करने से पूर्व इसका शुद्धिकरण करना चाहिए, बुधवार एवं बृहस्पतिवार के दिन किसी शुभ- मुहूत्त में इसे पंचामृत, दूध, गंगाजल से स्नान कराकर धूप-दीप से पूजा करके चांदी के आसन पर लाल कपडे़ के ऊपर प्रतिष्ठित करना चाहिए. इस शंख का खुला भाग आकाश की ओर तथा मुख वाला भाग अपनी और रखना चाहिए. अक्षत एवं रोली द्वारा इस शंख को भरना चाहिए. शंख पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर इसे चंदन, पुष्प, धूप दीप से पंचोपचार करके स्थापित करना चाहिए.
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एक मुखी रुद्राक्ष धारणकरने की विधि, 1 मुखी रुद्राक्ष के फायदे, एकमुखी रुद्राक्ष की पहचान Call- 9810196053

एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने की विधि, 1 मुखी रुद्राक्ष के फायदे, एकमुखी रुद्राक्ष की पहचान

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एक मुखी रुद्राक्ष धारणकरने की विधि1 मुखी रुद्राक्ष के फायदेएकमुखी रुद्राक्ष की पहचानएक मुखीरुद्राक्ष गोल दानाएक मुखी रुद्राक्ष की कीमतएक मुखी रुद्राक्ष के लाभ,एक मुखीरुद्राक्ष प्राइस

एक मुखी रूद्राक्ष व्यक्तिगत शक्ति, समृद्धि देता है। 1 मुखी रूद्राक्ष एकाग्रता की शक्ति और आंतरिकशांति प्रदान करता है। नेपाली एक मुखी रूद्राक्ष नेतृत्व गुणों को भीतनावपूर्णस्थितियों पर काबू पाने के लिए कौशल देता है। एक मुखी रूद्राक्ष सभी मुखी रूद्राक्षों में सबसे नायाब है। एक मुखी रूद्राक्ष पहनने वाला व्यक्ति सभी संसारिकसुखों का आनंद लेता है, फिर भी उनसे अलग रहता है। एक मुखी रूद्राक्ष के श्रोता बहुत आध्यात्मिक शक्तियोंराजनीतिक शक्तियों को प्राप्त करते हैं। एक मुखीरूद्राक्ष का पहनने वाला राजनीति में सर्वोच्च स्थान तक पहुंच सकता है।

एक मुखी रुद्राक्ष आधा चाँद आकार रुद्राक्ष है। एक मुखी रुद्राक्ष पूजा के दिन या शरीर में पकड़ आत्मविश्वास औरअसीम ऊर्जा की ओर जाता है लोगों को मन की अच्छी भावना है एक मुखीरूद्राक्ष का मानना ​​है कि शरीर मेंविभिन्नप्रकार के अवरोधों से छुटकारा मिल सकता है जैसेहार्ट अटूट भूत बाधाआकस्मिकआपदाएं

एक मुखी रुद्राक्ष लाभ

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दीपावली पूजा विधि, दीपावली पर माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 21 कारगर उपाय, दीपावली शुभ मुहूर्त और मंत्र के जाप Call- 9643992242

दीपावली आसान पूजा विधिदिपावली पूजन मुहूर्तश्री महालक्ष्मी पूजन व दीपावली का महापर्व, दिवाली की रात पर किए गएटोने-टोटके, दीपावली पर क्या करें

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लक्ष्मी कृपा पाने के लिए ज्योतिषियों के बताए 21 उपाय यहां दिए जा रहे हैं, इन्हें सभी राशियों के लोग कर सकते हैं। इनमें से कोई भी एक या अधिकउपाय करने से दरिद्रता दूर होकर सुख-सम्पत्ति का आगमन होता है।

1-दीपावली की रात में लक्ष्मी और कुबेर देव का पूजन करें और यहां दिए एकमंत्र का जप कम से कम 108 बार करें। मंत्र: ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रववाय, धन-धान्यधिपतये धन-धान्य समृद्धि मम देहि दापय स्वाहा

2-दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के बाद घर के सभी कमरों में शंख और घंटीबजाना चाहिए। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता बाहर चली जाती है। मां लक्ष्मी घर में आती हैं।

3- दीपावली पर तेल का दीपक जलाएं और दीपक में एक लौंग डालकरहनुमानजी की आरती करें। किसी मंदिर हनुमान मंदिर जाकर ऐसा दीपक भी लगा सकते हैं।

4- किसी शिवमंदिर जाएं और वहां शिवलिंग पर अक्षत यानी चावल चढ़ाएं। ध्यान रहें सभी चावल पूर्ण होने चाहिए। खंडित चावल शिवलिंग पर चढ़ाना नहीं चाहिए।

5- दीपावली पर महालक्ष्मी के पूजन में पीली कौड़ियां भी रखनी चाहिए। ये कौडिय़ा पूजन में रखने से महालक्ष्मी बहुत ही जल्द प्रसन्न होती हैं। आपकी धन संबंधी सभी परेशानियां खत्म हो जाएंगी।

6- लक्ष्मी पूजन के समय हल्दी की गांठ भी साथ रखें। पूजन पूर्ण होने पर हल्दी की गांठ को घर में उस स्थान पर रखें, जहां धन रखा जाता है।

7- दीपावली के दिन झाड़ू अवश्य खरीदना चाहिए। पूरे घर की सफाई नई झाड़ू से करें। जब झाड़ू का काम न हो तो उसे छिपाकर रखना चाहिए।

8- दीवाली के दिन किसी मंदिर में झाड़ू का दान करें। यदि आपके घर के आसपास कहीं महालक्ष्मी का मंदिर हो तो वहां गुलाब की सुगंध वालीअगरबत्ती का दान करें।

9- इस दिन अमावस्या रहती है और इस तिथि पर पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने पर शनि के दोष और कालसर्प दोष समाप्त हो जाते हैं।

10- दीपावली पर लक्ष्मी का पूजन करने के लिए स्थिर लग्न श्रेष्ठ माना जाता है। इस लग्न में पूजा करने पर महालक्ष्मी स्थाई रूप से घर में निवास करती हैं। पूजा में लक्ष्मीयंत्रकुबेर यंत्र और श्रीयंत्र रखना चाहिए। यदि स्फटिक काश्रीयंत्र हो तो सर्वश्रेष्ठ रहता है।

11- अपने घर के आसपास किसी पीपल के पेड़ के नीचे तेल का दीपकजलाएं। यह उपाय दीपावली की रात में किया जाना चाहिए। ध्यान रखें दीपकलगाकर चुपचाप अपने घर लौट आए, वापिस पलटकर न देखें।

12- दीपावली की रात लक्ष्मी पूजा करते समय एक थोड़ा बड़ा घी का दीपकजलाएं, जिसमें नौ बत्तियां लगाई जा सके। सभी 9 बत्तियां जलाएं और लक्ष्मी पूजा करें।

13- दीपावली की रात में लक्ष्मी पूजन के साथ ही अपनी दुकान, कम्प्यूटर आदि ऐसी चीजों की भी पूजा करें, जो आपकी कमाई का साधन हैं।

14- लक्ष्मी पूजन के समय एक नारियल लें और उस पर अक्षत, कुमकुमपुष्पआदि अर्पित करें और उसे भी पूजा में रखें।

15- दीपावाली पर श्रीसूक्त एवं कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।रामरक्षा स्तोत्र या हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ भी किया जासकता है।

16- प्रथम पूज्य श्रीगणेश को दूर्वा अर्पित करें। दूर्वा की 21 गांठ गणेशजी को चढ़ाने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। दीपावली के शुभ दिन यह उपाय करने सेगणेशजी के साथ महालक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है।

17- दीवाली की रात सोने से पहले किसी चौराहे पर तेल का दीपक जलाएं और घर लौटकर आ जाएं। ध्यान रखें पीछे पलटकर न देखें।

18- महालक्ष्मी के चित्र का पूजन करें, जिसमें लक्ष्मी अपने स्वामी भगवानविष्णु के पैरों के पास बैठी हैं। ऐसे चित्र का पूजन करने पर देवी बहुत जल्दप्रसन्न होती हैं।

20- दीपावली के दिन यदि संभव हो सके तो किसी किन्नर से उसकी खुशी से एक रुपया लें और इस सिक्के को अपने पर्स में रखें। बरकत बनी रहेगी।

21- दीपावली के दिन घर से निकलते ही यदि कोई सुहागन स्त्री लाल रंग की पारंपरिक ड्रेस में दिख जाए तो समझ लें आप पर महालक्ष्मी की कृपा होने वाली है। यह एक शुभ शकुन है। ऐसा होने पर किसी जरूरतमंद सुहागन स्त्रीको सुहाग की सामग्री दान करें।

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गौरी शंकर रुद्राक्ष, शिव शक्ति रुद्राक्ष, गौरी शंकर रुद्राक्ष की चित्र, असली गौरी शंकर रुद्राक्ष.Call-9643992242

गौरी शंकर रुद्राक्ष, शिव शक्ति रुद्राक्ष

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गौरी शंकर रुद्राक्ष भगवान शिव एवं माँ पार्वती का प्रत्यक्ष स्वरूप है | इसके धारक को शिव और शक्ति दोनों की कृपा प्राप्त होती है |जिसके घर में यह रुद्राक्ष होता है वहां लक्ष्मी का स्थाई वास हो जाता है तथा उसका घर धन-धान्य, वैभव, प्रतिष्ठा और दैवीय कृपा से भर जाता है।गौरी शंकर रुद्राक्ष माता पार्वती एवं भगवान शिव का प्रतीक है जैसा क नाम से ही स्पष्ट होता है कि यह रुद्राक्ष शिव पार्वती जी की एक अदभुत संगम का रुप है.
गौरी-शंकर रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति को सुखी दांपत्य जीवन और खुशहाल परिवार की प्राप्ति होती है और भाग्य में वृद्धि होती है और वैवाहिक जीवन में कोई समस्या नहीं आती है। यह आर्थिक दृष्टि से विशेष सफलता दिलाता है। पारिवारिक सामंजस्य, आकर्षण, मंगलकामनाओं की सिद्धी में सहायक है। धन-धान्य से परिपूर्ण करता है। लड़के या लड़की के विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर कर उत्तम वर या वधू प्राप्ति में सहायक सिद्ध होता है।

गौरी शंकर रुद्राक्ष प्राकृतिक रूप से परस्पर जुड़े दो रुद्राक्षों को गौरी -शंकर रुद्राक्ष कहा जाता है । गौरी -शंकर रुद्राक्ष को भगवान शिव और माता गौरी का रूप माना जाता है । इसलिए इसका नाम गौरी शंकर रुद्राक्ष पड़ा है । यह रुद्राक्ष एक मुख वाला तथा चौदह मुख वाले की तरह बहुत ही दुर्लभ और विशिष्ट रुद्राक्ष होता है । इसमें शंकर का वरदान और माँ पार्वती की दिव्य शक्तियाँ निहित होती है । इसको पहनने से भगवान शंकर और माता पार्वती दोनों ही समान रूप से खुश होते हैं और अनेक प्रकार वरदान और शक्तियां धारणकर्ता को प्राप्त होते हैं । माता पार्वती हमेशा ही भगवान शंकरको मनुष्यों को वरदान देने को प्रेरित करती रहती हैं ।

यह रुद्राक्ष मानव को हर तरह के रुद्राक्ष से होने वाले लाभ को अकेले ही दिलवाता है ,जो व्यक्ति एक मुख वाला अथवाचौदह मुख वाला रुद्राक्ष पहनना चाहते हों और पहन नही सकते हों उन्हें गौरी -शंकर रुद्राक्ष जरूर ही धारण करना चाहिए ,क्योंकि एक मुख वाले और चौदह मुख वाले के समान ही यह रुद्राक्ष भी हर तरह की सिद्धियों का दाता है । यह अपने आप में वशिष्ट रुद्राक्ष है ।

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गणेश रुद्राक्ष भगवान गणेशजी का प्रतिनिधित्व करता है । इसकी आकृति भी उनके जैसी प्रतीत होती है । इस रुद्राक्ष पर सूंड के समान एक उभार होता है । इसे धारण करने से समस्त विघ्नों का नाश होता है व धन -सम्पति की प्राप्ति होती है । गणपतिजी का आशीर्वाद प्राप्त होता है । इनके सानिध्य को पाकर व्यक्ति सभी समस्याओं से मुक्त हो जाता है और सभी सुखों को भोगता हुआ मोक्ष को प्राप्त करता है । बुद्धि ज्ञान को बढ़ाने वाला यह रुद्राक्ष अच्छी कार्य क्षमता प्रदान करता है । नियमित रूप से इसकी पूजा -अर्चना करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं व मानसिक समस्याओं का निराकरण करता है । इसे बाधाओं को दूर करने वाला व ऋद्धि -सिद्धि प्रदान करने वाला माना गया है जो व्यक्ति इसे धारण करता है ,उसे अपार समृद्धि प्राप्त होती है । यह एक दिव्य मनका है इसे पहनने से आध्यात्मिक ,मानसिक और शारीरिक लाभ मिलता है । रुद्राक्ष से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए इसकी प्राणप्रतिष्ठा की जनि चाहिए ।

गणेश रुद्राक्ष प्राकृतिक रूप से रुद्राक्ष पर एक उभरी हुई सुंडाकृति बनी रहती है। उसे गणेश रुद्राक्ष कहा जाता है। यह अत्यंत दुर्लभ तथा शक्तिशाली रुद्राक्ष है। यह गणेशजी की शक्ति तथा सायुज्यता का द्योतक है। धारण करने वाले को यह बुद्धि, रिद्धी-सिद्धी प्रदान कर व्यापार में आश्चर्यजनक प्रगति कराता है। विद्यार्थियों के चित्त में एकाग्रता बढ़ाकर सफलता प्रदान करने में सक्षम होता है। विघ्न-बाधाओं से रक्षा कर चहुँमुखी विकास कराता है। यश-कीर्ति, वैभव, मान-सम्मान, प्रतिष्ठा में वृद्धिकारक सिद्ध होता है।

गणेश रुद्राक्ष सभी तरह के क्लेशों का शमन करने वाला होता है । इसको देखने पर प्रतीत होता है कि इस पर भगवान गणेश की आंशिक आकृति उभरी हुई है । इसकी सतह पर बनी हुई सूंडनुमा आकृति से यह रुद्राक्ष गणेश भगवान का रूप दीखता है । विशेष फलदायी यह रुद्राक्ष की समस्याओं का समाधान स्वतः ही कर देता है । इसे गणेश चतुर्थी के दिन धारण किया जाए तो यह और भी फलदायक होता है । इसे सोमवार को लाल धागे या सोने अथवा चांदी में धारण कर सकते हैं ।

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