भागवत महापुराण तृतीय स्कंध अध्याय 5 विदुर का प्रश्न और मैत्रेयजी का सृष्टिक्रम वर्णन की कथा

#श्रीमद्भागवत #महापुराण #तृतीय #स्कंध #अध्याय 5 #विदुर का #प्रश्न और #मैत्रेय जी का #सृष्टि क्रम #वर्णन की #कथा #सुनिए by Pandit Pradeep Pandey 9871030464 https://youtu.be/nSPd3LWXeKw #विदुर जी ने कहा- भगवन् ! संसार में सब लोग #सुख के लिये कर्म करते हैं! परन्तु उनसे न तो उन्हें सुख ही मिलता है और न उनका दुःख ही दूर होता है, बल्कि उससे भी उनके #दुःख की वृद्धि ही होती है। अतः इस विषय में क्या करना उचित है, यह आप मुझे कृपा करके बतलाइये। जो लोग दुर्भाग्यवश भगवान् #श्रीकृष्ण से विमुख, अधर्मपरायण और अत्यन्त दुःखी हैं, उन पर कृपा करने के लिये ही आप-जैसे भाग्यशाली #भगवद्भक्त संसार में विचरा करते हैं। #साधुशिरोमणि ! आप मुझे उस शान्तिप्रद साधन का उपदेश दीजिये, जिसके अनुसार आराधना करने से #भगवान् अपने भक्तों के भक्तिपूत हृदय में आकर विराजमान हो जाते हैं और अपने स्वरूप का अपरोक्ष अनुभव कराने वाला सनातन ज्ञान प्रदान करते हैं। #त्रिलोकी के नियन्ता और परम स्वतन्त्र #श्रीहरि अवतार लेकर जो-जो लीलाएँ करते हैं; जिस प्रकार अकर्ता होकर भी उन्होंने कल्प के आरम्भ में इस #सृष्टि की रचना की, जिस प्रकार इसे स्थापित कर वे जगत् के जीवों की #जीविका का विधान करते हैं, फिर जिस प्रकार इसे अपने हृदयाकाश में लीनकर वृत्तिशून्य हो योगमाया का आश्रय लेकर शयन करते हैं और जिस प्रकार वे #योगेश्वरेश्वर प्रभु एक होने पर भी इस #ब्रह्माण्ड में अन्तर्यामी रूप से अनुप्रविष्ट होकर अनेकों रूपों में प्रकट होते हैं-वह सब रहस्य आप हमें समझाइये। #ब्राह्मण, गौ और देवताओं के कल्याण के लिये जो अनेकों अवतार धारण करके लीला से ही नाना प्रकार के दिव्य कर्म करते हैं, वे भी हमें सुनाइये। यशस्वियों के मुकुटमणि #श्रीहरि के लीलामृत का पान करते-करते हमारा मन तृप्त नहीं होता। हमें यह भी सुनाइये कि उन समस्त लोकपतियों के स्वामी श्रीहरि ने इन लोकों, #लोकपालों और लोकालोक-पर्वत से बाहर के भोगों को, जिसमें ये सब प्रकार के प्राणियों के अधिकारानुसार भिन्न-भिन्न भेद प्रतीत हो रहे हैं, किन #तत्त्वों से रचा है। #श्रीमद्भागवत कथा #तृतीय स्कन्ध पंचम #अध्याय, #विदुर जी का प्रश्न और #मैत्रेय जी का सृष्टिक्रम #वर्णन की कथा सुनिए अध्याय #पंचम, श्रीमद्भागवत #महापुराण #संस्कृत हिंदी pdf, #श्रीमद् भागवत महापुराण संस्कृत #हिंदी, श्रीमद्भागवत #महापुराण #गीता #प्रेस कथा, Importance of #shrimadbhagwat katha, shri #madbhagwat #mahapuran ki #katha, #श्रीमद्भागवत महापुराण #तृतीय स्कन्ध अध्याय 5 की #कथा, अध्याय 5 विदुर जी का #प्रश्न और मैत्रेय जी का #सृष्टिक्रम वर्णन, #विदुर जी का प्रश्न और #मैत्रेय जी का सृष्टिक्रम #वर्णन अध्याय 5 की कथा #सुनिए तृतीय स्कन्ध: पंचम अध्याय

भागवत महापुराण तृतीय स्कंध अध्याय 4 उद्धवजी से विदा होकर विदुरजी का मैत्रेय ऋषि के पास जाना

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भागवत महापुराण तृतीय स्कंध अध्याय 3 भगवान के अन्य लीला चरित्रों का वर्णन की कथा सुनिए

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#उद्धव जी कहते हैं- इसके बाद #श्रीकृष्ण अपने माता-पिता #देवकी-वसुदेव को सुख पहुँचाने की इच्छा से #बलदेव जी के साथ #मथुरा पधारे और उन्होंने #शत्रु समुदाय के स्वामी #कंस को ऊँचे सिंहासन से नीचे पटककर तथा उसके #प्राण लेकर उसकी लाश को बड़े जोर से #पृथ्वी पर घसीटा। #सान्दीपनि मुनि के द्वारा एक बार उच्चारण किये हुए सांगोपांग #वेद का अध्ययन करके #दक्षिणा स्वरूप उनके मरे हुए #पुत्र को #पंचजन नामक #राक्षस के पेट से (#यमपुरी से) लाकर दे दिया।
एक बार #द्वारकापुरी में खेलते हुए #यदुवंशी और #भोजवंशी बालकों ने खेल-खेल में कुछ #मुनीश्वरों को चिढ़ा दिया। तब #यादव कुल का नाश ही #भगवान् को अभीष्ट है-यह समझकर उन #ऋषियों ने बालकों को शाप दे दिया। इसके कुछ ही महीने बाद भावीवश #वृष्णि, #भोज और #अन्धकवंशी #यादव बड़े हर्ष से रथों पर चढ़कर #प्रभास क्षेत्र को गये। वहाँ स्नान करके उन्होंने उस #तीर्थ के जल से #पितर, #देवता और #ऋषियों का #तर्पण किया तथा #ब्राह्मणों को श्रेष्ठ #गौएँ दीं।
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भागवत महापुराण तृतीय स्कंध अध्याय 2 उद्धव जी द्वारा भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन की कथा सुनिए

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#श्रीशुकदेव जी कहते हैं- जब #विदुर जी ने परम भक्त #उद्धव से इस प्रकार उनके प्रियतम श्रीकृष्ण से सम्बन्ध रखने वाली बातें पूछीं, तब उन्हें अपने #स्वामी का स्मरण हो आया और वे हृदय भर आने के कारण कुछ भी उत्तर न दे सके। जब ये पाँच वर्ष के थे, तब बालकों की तरह खेल में ही #श्रीकृष्ण की मूर्ति बनाकर उसकी सेवा-पूजा में ऐसे तन्मय हो जाते थे कि कलेवे के लिये #माता के बुलाने पर भी उसे छोड़कर नहीं जाना चाहते थे, अब तो दीर्घकाल से उन्हीं की सेवा में रहते-रहते ये #बूढ़े हो चले थे | अतः विदुर जी के पूछने से उन्हें अपने प्यारे #प्रभु के चरणकमलों का स्मरण हो आया-उनका चित्त #विरह से व्याकुल हो गया। फिर वे कैसे उत्तर दे सकते थे। उद्धव जी #श्रीकृष्ण के चरणारविन्द-मकरन्द सुधा से सराबोर होकर दो घड़ी तक कुछ भी नहीं बोल सके। तीव्र #भक्तियोग से उसमें डूबकर वे आनन्द-मग्न हो गये। उनके सारे शरीर में रोमांच हो आया तथा मुँदे हुए नेत्रों से प्रेम के #आँसुओं की धारा बहने लगी। उद्धव जी को इस प्रकार प्रेमप्रवाह में डूबे हुए देखकर #विदुर जी ने उन्हें कृतकृत्य माना। कुछ समय बाद जब उद्धव जी भगवान् के प्रेमधाम से उतरकर पुनः धीरे-धीरे संसार में आये, तब अपने नेत्रों को पोंछकर #भगवल्लीलाओं का स्मरण हो आने से विस्मित हो विदुर जी से इस प्रकार कहने लगे।
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भागवत महापुराण द्वितीय स्कंध अध्याय 10 भागवत पुराण के दस विषयों का वर्णन की कथा सुनिए

#श्रीमद्भागवत #महापुराण #द्वितीय #स्कंध #अध्याय 10 #भागवत #पुराण के #दस #लक्षण #विषयों का #वर्णन की #कथा #सुनिए by Pandit Pradeep pandey 9871030464 https://youtu.be/UiK_E7Pj0XE https://goo.gl/maps/NDYdYv1RBut #श्रीशुकदेव जी कहते हैं- #परीक्षित इस #भागवत #पुराण में #सर्ग, #विसर्ग, #स्थान, #पोषण, #ऊति, #मन्वन्तर, #ईशानुकथा, #निरोध, #मुक्ति और #आश्रय– इन #दस विषयों का #वर्णन है। इसमें जो #दसवाँ #आश्रय-तत्त्व है, उसी का ठीक-ठीक निश्चय करने के लिये कहीं श्रुति से, कहीं #तात्पर्य से और कहीं दोनों के अनुकूल अनुभव से #महात्माओं ने अन्य नौ विषयों का बड़ी सुगम रीति से #वर्णन किया है। #ईश्वर की प्रेरणा से गुणों में क्षोभ होकर रूपान्तर होने से जो आकाशादि #पंचभूत, शब्दादि #तन्मात्राएँ, #इन्द्रियाँ, अहंकार और महत्तत्त्व की उत्पत्ति होती है, उसो #सर्ग कहते हैं। उस विराट् पुरुष से उत्पन्न #ब्रह्मा जी के द्वारा जो विभिन्न चराचर #सृष्टियों का निर्माण होता है, उसका नाम है #विसर्ग। प्रतिपद #नाश की ओर बढ़ने वाली #सृष्टि को एक मर्यादा में स्थिर रखने से भगवान् #विष्णु की जो श्रेष्ठता #सिद्ध होती है, उसका नाम #स्थान है। #श्रीमद्भागवत कथा #द्वितीय स्कन्ध #दशम #अध्याय, #भागवत के दस #लक्षण की #कथा सुनिए #अध्याय #दशम, भागवत के दस विषयों का #वर्णन अध्याय #दशम, #श्रीमद्भागवत #महापुराण संस्कृत #हिंदी pdf, श्रीमद् #भागवत महापुराण #संस्कृत हिंदी, श्रीमद्भागवत #महापुराण #गीता #प्रेस कथा, Importance of #shrimadbhagwat #katha, shri #madbhagwat #mahapuran ki #katha, #श्रीमद्भागवत #महापुराण #द्वितीय स्कन्ध #अध्याय 10 की #कथा, #अध्याय 10 #भागवत के दस #विषयों का #वर्णन, #भागवत के दस #लक्षण की कथा सुनिए

भागवत महापुराण द्वितीय स्कंध अध्याय 9 ब्रह्माजी का भगवद्धाम दर्शन, चतु:श्लोकी भागवत का उपदेश

#श्रीमद्भागवत #महापुराण #द्वितीय #स्कंध #अध्याय 9 #ब्रह्माजी का #भगवद्धाम #दर्शन और #भगवान के द्वारा उन्हें #चतु:श्लोकी #भागवत का #उपदेश की #कथा #सुनिए by Pandit Pradeep Pandey 9871030464 https://youtu.be/uZG3uDVOops https://goo.gl/maps/NDYdYv1RBut
#ब्रह्मा जी तपस्वियों में सबसे बड़े #तपस्वी हैं। उनका ज्ञान #अमोघ है। उन्होंने एक समय एक #सहस्र दिव्य वर्ष पर्यन्त एकाग्रचित्त से अपने प्राण, मन, #कर्मेन्द्रिय और ज्ञानेन्द्रियों को वश में करके ऐसी #तपस्या की, जिससे वे समस्त लोकों को #प्रकाशित करने में समर्थ हो सके। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर #भगवान् ने उन्हें अपना वह लोक दिखाया, जो सबसे श्रेष्ठ है और जिससे परे कोई दूसरा #लोक नहीं है। उस लोक में किसी भी प्रकार के क्लेश, #मोह और भय नहीं हैं। जिन्हें कभी एक बार भी उनके दर्शन का #सौभाग्य प्राप्त हुआ है, वे #देवता बार-बार उनकी स्तुति करते रहते हैं। वहाँ रजोगुण, #तमोगुण और इनसे मिला हुआ #सत्त्वगुण भी नहीं है। वहाँ न #काल की दाल गलती है और न #माया ही कदम रख सकती है; फिर माया के बाल-बच्चे तो जा ही कैसे सकते हैं। वहाँ भगवान् के वे #पार्षद निवास करते हैं, जिनका पूजन #देवता और #दैत्य दोनों ही करते हैं। उनका उज्ज्वल आभा से युक्त श्याम शरीर शतदल #कमल के समान कोमल नेत्र और पीले रंग के वस्त्र से शोभायमान है। अंग-अंग से राशि-राशि सौन्दर्य बिखरता रहता है। वे कोमलता की #मूर्ति हैं। सभी के चार-चार भुजाएँ हैं। वे स्वयं तो अत्यन्त #तेजस्वी हैं ही, मणिजटित #सुवर्ण के प्रभामय #आभूषण भी धारण किये रहते हैं। उनकी छवि #मूँगे, #वैदूर्यमणि और #कमल के उज्ज्वल #तन्तु के समान हैं।
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भागवत महापुराण द्वितीय स्कन्द अध्याय 7 भगवान के लीला अवतारों की कथा सुनिए

#श्रीमद्भागवत #महापुराण #द्वितीय #स्कन्द #अध्याय 7 #भगवान के #लीला #अवतारों की #कथा #सुनिए by Pandit Pradeep Pandey 9871030464 https://youtu.be/a0GdVQIS7g0 https://goo.gl/maps/NDYdYv1RBut
#ब्रह्मा जी कहते हैं- अनन्त #भगवान् ने प्रलय के जल में डूबी हुई #पृथ्वी का उद्धार करने के लिये समस्त यज्ञमय #वराह शरीर ग्रहण किया था। आदिदैत्य #हिरण्याक्ष जल के अंदर ही लड़ने के लिये उनके सामने आया। जैसे #इन्द्र ने अपने वज्र से पर्वतों के पंख काट डाले थे, वैसे ही वराह #भगवान् ने अपनी दाढ़ों से उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिये। फिर उन्हीं #प्रभु ने रुचि नामक #प्रजापति की पत्नी आकूति के गर्भ से #सुयज्ञ के रूप में ##अवतार ग्रहण किया। उस अवतार में उन्होंने #दक्षिणा नाम की पत्नी से सुयम नाम के #देवताओं को उत्पन्न किया और तीनों #लोकों के बड़े-बड़े संकट हर लिये। इसी से #स्वायम्भुव मनु ने उन्हें ‘#हरि’ के नाम से पुकारा।
#नारद! कर्दम प्रजापति के घर देवहूति के #गर्भ से नौ #बहिनों के साथ भगवान् ने #कपिल के रूप में अवतार ग्रहण किया। उन्होंने अपनी #माता को उस आत्मज्ञान का उपदेश किया, जिससे वे इसी #जन्म में अपने हृदय के सम्पूर्ण मल- तीनों गुणों की #आसक्ति का सारा कीचड़ धोकर ##कपिल भगवान् के वास्तविक स्वरूप को प्राप्त हो गयीं। महर्षि #अत्रि भगवान् को पुत्र रूप में प्राप्त करना चाहते थे। उन पर प्रसन्न होकर भगवान् ने उनसे एक दिन कहा कि ‘मैंने अपने-आपको तुम्हें दे दिया।’ इसी से अवतार लेने पर #भगवान् का नाम ‘दत्त’ #दत्तात्रेय पड़ा। उनके चरणकमलों के पराग से अपने शरीर को पवित्र करके राजा #यदु और #सहस्रार्जुन आदि ने योग की, #भोग और #मोक्ष दोनों ही #सिद्धियाँ प्राप्त कीं।
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