भागवत महापुराण तृतीय स्कंध अध्याय 4 उद्धवजी से विदा होकर विदुरजी का मैत्रेय ऋषि के पास जाना

#श्रीमद्भागवत #महापुराण #तृतीय #स्कंध #अध्याय 4 #उद्धवजी से #विदा होकर #विदुरजी का #मैत्रेय #ऋषि के पास जाना की #कथा #सुनिए by Pandit Pradeep Pandey 9871030464 https://youtu.be/E92J8RpG40w #विदुर जी! इससे यद्यपि मैं उनका आशय समझ गया था, तो भी स्वामी के चरणों का वियोग न सह सकने के कारण मैं उनके पीछे-पीछे #प्रभास क्षेत्र में पहुँच गया। वहाँ मैंने देखा कि जो सबके आश्रय हैं किन्तु जिनका कोई और आश्रय नहीं है, वे प्रियतम प्रभि शोभाधाम #श्यामसुन्दर सरस्वती के तट पर अकेले ही बैठे हैं। दिव्य विशुद्ध-सत्त्वमय अत्यन्त सुन्दर #श्याम शरीर है, शान्ति से भरी रतनारी आँखें हैं। उनकी चार भुजाएँ और रेशमी पीताम्बर देखकर मैंने उनको दूर से ही पहचान लिया। वे एक #पीपल के छोटे-से वृक्ष का सहारा लिये बायीं जाँघ पर दायाँ चरणकमल रखे बैठे थे। भोजन-पान का #त्याग कर देने पर भी वे आनन्द से प्रफुल्लित हो रहे थे। इसी समय व्यास जी के प्रिय मित्र परम #भागवत सिद्ध मैत्रेय जी लोकों में स्वच्छन्द विचरते हुए वहाँ आ पहुँचे। मैत्रेय मुनि भगवान् के अनुरागी भक्त हैं। आनन्द और #भक्तिभाव से उनकी गर्दन झुक रही थी। उनके सामने ही #श्रीहरि ने प्रेम एवं मुस्कान युक्त चितवन से मुझे आनन्दित करते हुए कहा। #श्रीकृष्ण भगवान् कहते हैं- मैं तुम्हारी आन्तरिक अभिलाषा जानता हूँ; इसलिये मैं तुम्हें वह साधन देता हूँ, जो दूसरों के लिये अत्यन्त दुर्लभ है। उद्धव! तुम #पूर्वजन्म में वसु थे। विश्व की रचना करने वाले प्रजापतियों और वसुओं के यज्ञ में मुझे पाने की इच्छा से ही तुमने मेरी #आराधना की थी। साधुस्वभाव उद्धव! संसार में तुम्हारा यह अन्तिम जन्म है; क्योंकि इसमें तुमने मेरा अनुग्रह प्राप्त कर लिया है। अब मैं #मर्त्यलोक को छोड़कर अपने धाम में जाना चाहता हूँ। इस समय यहाँ #एकान्त में तुमने अपनी अनन्य भक्ति के कारण ही मेरा दर्शन पाया है, यह बड़े सौभाग्य की बात है। पूर्वकाल (पाद्मकल्प) के आरम्भ में मैंने अपने नाभिकमल पर बैठे हुए #ब्रह्मा को अपनी महिमा से प्रकट करने वाले जिस श्रेष्ठ ज्ञान का उपदेश किया था और जिसे विवेकी लोग #भागवत कहते हैं, वही मैं तुम्हें देता हूँ। #श्रीमद्भागवत कथा #तृतीय स्कन्ध चतुर्थ #अध्याय, #उद्धव जी से विदा होकर #विदुर जी का मैत्रेय #ऋषि के पास जाना की कथा सुनिए अध्याय #चतुर्थ, उद्धव जी से विदा होकर विदुर जी का #मैत्रेय ऋषि के पास जाना चतुर्थ, श्रीमद्भागवत #महापुराण संस्कृत #हिंदी pdf, श्रीमद् #भागवत महापुराण #संस्कृत हिंदी, #श्रीमद्भागवत महापुराण #गीता #प्रेस #कथा, #Importance of #shrimadbhagwat katha, shri #madbhagwat mahapuran ki #katha, श्रीमद्भागवत महापुराण #तृतीय स्कन्ध अध्याय 4 की #कथा, अध्याय 4 #उद्धव जी से विदा होकर #विदुर जी का मैत्रेय ऋषि के पास जाना, #अध्याय 4 उद्धव जी से विदा होकर विदुर जी का #मैत्रेय ऋषि के पास जाना की #कथा सुनिए

भागवत महापुराण तृतीय स्कंध अध्याय 3 भगवान के अन्य लीला चरित्रों का वर्णन की कथा सुनिए

#श्रीमद्भागवत #महापुराण #तृतीय #स्कंध #अध्याय 3 #भगवान के अन्य #लीला #चरित्रों का #वर्णन की #कथा #सुनिए by Pandit Pradeep Pandey 9871030464 https://youtu.be/xjn0AebffhY
#उद्धव जी कहते हैं- इसके बाद #श्रीकृष्ण अपने माता-पिता #देवकी-वसुदेव को सुख पहुँचाने की इच्छा से #बलदेव जी के साथ #मथुरा पधारे और उन्होंने #शत्रु समुदाय के स्वामी #कंस को ऊँचे सिंहासन से नीचे पटककर तथा उसके #प्राण लेकर उसकी लाश को बड़े जोर से #पृथ्वी पर घसीटा। #सान्दीपनि मुनि के द्वारा एक बार उच्चारण किये हुए सांगोपांग #वेद का अध्ययन करके #दक्षिणा स्वरूप उनके मरे हुए #पुत्र को #पंचजन नामक #राक्षस के पेट से (#यमपुरी से) लाकर दे दिया।
एक बार #द्वारकापुरी में खेलते हुए #यदुवंशी और #भोजवंशी बालकों ने खेल-खेल में कुछ #मुनीश्वरों को चिढ़ा दिया। तब #यादव कुल का नाश ही #भगवान् को अभीष्ट है-यह समझकर उन #ऋषियों ने बालकों को शाप दे दिया। इसके कुछ ही महीने बाद भावीवश #वृष्णि, #भोज और #अन्धकवंशी #यादव बड़े हर्ष से रथों पर चढ़कर #प्रभास क्षेत्र को गये। वहाँ स्नान करके उन्होंने उस #तीर्थ के जल से #पितर, #देवता और #ऋषियों का #तर्पण किया तथा #ब्राह्मणों को श्रेष्ठ #गौएँ दीं।
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