भागवत महापुराण प्रथम स्कन्ध अध्याय 6 देवर्षि नारद जी के पूर्व जन्म की कथा सुनिये

#श्रीमद्भागवत #महापुराण #प्रथम #स्कन्ध #अध्याय 6 #देवर्षि #नारद जी के #पूर्व जन्म की #कथा सुनिये by Pandit Pradeep Pandey 9871030464 https://youtu.be/S2qGbPUY0io https://goo.gl/maps/NDYdYv1RBut
श्रीव्यास जी ने पूछा- #नारद जी! जब आपको ज्ञानोपदेश करने वाले #महात्मागण चले गये, तब आपने क्या किया? उस समय तो आपकी अवस्था बहुत छोटी थी। #स्वायम्भु! आपकी शेष आयु किस प्रकार व्यतीत हुई और #मृत्यु के समय आपने किस विधि से अपने शरीर का #परित्याग किया? देवर्षे! काल तो सभी वस्तुओं को नष्ट कर देता है, उसने आपकी पूर्व #कल्प की स्मृति का कैसे नाश नहीं किया?
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श्रीमद्भागवत कथा प्रथम स्कन्ध अध्याय 5 भगवान के यश कीर्तन की महिमा

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भागवत महापुराण प्रथम स्कन्ध अध्याय 4 महर्षि व्यास जी का असंतोष की कथा सुनिये

#श्रीमद्भागवत #महापुराण #प्रथम #स्कन्ध #अध्याय 4 #महर्षि #व्यास जी का #असंतोष की #कथा #सुनिये by Pandit Pradeep Pandey 9871030464 https://youtu.be/SbxBfTTejt8 https://goo.gl/maps/NDYdYv1RBut
#व्यास जी कहते हैं- उस दीर्घकालीन सत्र में सम्मिलित हुए मुनियों में विद्यावयोवृद्ध #कुलपति ऋग्वेदी शौनक जी ने सूत जी की पूर्वोक्त बात सुनकर उनकी प्रशंसा की और कहा। शौनक जी बोले- #सूत जी! आप वक्ताओं में श्रेष्ठ हैं तथा बड़े भाग्यशाली हैं, जो कथा भगवान #श्रीशुकदेव जी ने कही थी, वही भगवान की पुण्यमयी कथा कृपा करके आप हमें सुनाइये। वह #कथा किस युग में, किस स्थान पर और किस कारण से हुई थी? मुनिवर #श्रीकृष्णद्वैपायन ने किसकी प्रेरणा से इस #परमहंसों की संहिता का निर्माण किया था। उनके पुत्र #शुकदेव जी बड़े योगी, समदर्शी, भेदभावरहित, संसार निद्रा से एवं निरन्तर एकमात्र परमात्मा में ही स्थिर रहते हैं।
#शौनकादि ऋषियों! यद्यपि व्यास जी इस प्रकार अपनी पूरी शक्ति से सदा-सर्वदा प्राणियों के #कल्याण में ही लगे रहे, तथापि उनके हृदय को सन्तोष नहीं हुआ। उनका मन कुछ खिन्न-सा हो गया। #सरस्वती नदी के पवित्र तट पर एकान्त में बैठकर #धर्मवेत्ता व्यास जी मन-ही-मन विचार करते हुए इस प्रकार कहने लगे- ‘मैंने निष्कपट भाव से ब्रह्मचर्यादी व्रतों का पालन करते हुए #वेद, #गुरुजन और अग्नियों का सम्मान किया है और उनकी आज्ञा का पालन किया है। #महाभारत की रचना के बहाने मैंने #वेद के अर्थ को खोल दिया है- जिससे स्त्री, शूद्र आदि भी अपने-अपने #धर्म-कर्म का ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं।
श्रीकृष्णद्वैपायन #व्यास इस प्रकार अपने को अपूर्ण-सा मानकर जब खिन्न हो रहे थे, उसी समय पूर्वोक्त आश्रम पर देवर्षि #नारद जी आ पहुँचे। उन्हें आया देख व्यास जी तुरन्त खड़े हो गये। उन्होंने देवताओं के द्वारा सम्मानित #देवर्षि नारद की विधिपूर्वक #पूजा की।
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भागवत महापुराण प्रथम स्कन्ध प्रथम अध्याय सूतजी से सौनकादि ऋषिओ का प्रश्न की कथा सुनिए

#श्रीमद्भागवत #महापुराण की #कथा सुनिए, #प्रथम #स्कन्ध #प्रथमोध्याय श्री #सूत जी से #सौनकादि #ऋषियो का प्रश्न, #मंगलाचरण by Pandit Pradeep Pandey 9871030464 https://youtu.be/PrIJkGsDz7o
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जिससे इस जगत् की #सृष्टि, स्थिति और #प्रलय होते हैं- क्योंकि वह सभी सद्रूप पदार्थों में अनुगत है और असत् पदार्थों से पृथक् है; #जड़ नहीं, चेतन है; #परतन्त्र नहीं, स्वयं प्रकाश है| जो #ब्रह्मा अथवा #हिरण्यगर्भ नहीं, प्रत्युत उन्हें अपने संकल्प से ही जिसने उस वेद #ज्ञान का दान दिया है| जिसके सम्बन्ध में बड़े-बड़े #विद्वान् भी मोहित हो जाते हैं; जैसे #तेजोमय सूर्य #रश्मियों में जल का, जल में स्थल का और स्थल में जल का भ्रम होता है, वैसे ही जिसमें यह #त्रिगुणमयी जाग्रत्-स्वप्न-#सुषुप्तिरूपा सृष्टि मिथ्या होने पर भी #अधिष्ठान-सत्ता से #सत्यवत् प्रतीत हो रही है, उस अपनी स्वयं प्रकाश ज्योति से सर्वदा और #सर्वथा माया और माया कार्य से पूर्णतः मुक्त रहने वाले परम सत्य रूप #परमात्मा का हम ध्यान करते हैं।
#वेदवेत्ताओं में श्रेष्ठ #भगवान #बादरायण ने एवं भगवान के सगुण-निर्गुण रूप को जानने वाले दूसरे #मुनियों ने जो कुछ जाना है- उन्हें जिन विषयों का #ज्ञान है, वह सब आप #वास्तविक रूप में जानते हैं। आपका #हृदय बड़ा ही सरल और शुद्ध है, इसी से आप उनकी #कृपा और अनुग्रह के पात्र हुए हैं। #गुरुजन अपने प्रेमी शिष्य को गुप्त-से-गुप्त बात भी बता दिया करते हैं। #आयुष्मान्! आप कृपा करके यह बतलाइये कि उन सब #शास्त्रों, पुराणों और #गुरुजनों के उपदेशों में #कलियुगी जीवों के परम #कल्याण का सहस साधन आपने क्या निश्चय किया है।
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भागवत महापुराण प्रथम स्कन्ध दूसरा अध्याय भगवत्कथा और भगवद्भक्ति का महात्म्य की कथा सुनिये

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#सूतजी ने कहा—जिस समय #श्रीशुकदेवजी का यज्ञोपवीत-संस्कार भी नहीं हुआ था, सुतरां लौकिक-वैदिक कर्मों के #अनुष्ठान का अवसर भी नहीं आया था, उन्हें अकेले ही #संन्यास लेने के उद्देश्य से जाते देखकर उनके पिता व्यासजी विरह से कातर होकर पुकारने लगे—‘बेटा! बेटा!’ उस समय #तन्मय होने के कारण श्रीशुकदेवजी ओर से वृक्षों ने उत्तर दिया। ऐसे सबके ह्रदय में #विराजमान श्रीशुकदेव मुनि को मैं नमस्कार करता हूँ । यह #श्रीमद्भागवत अत्यन्त गोपनीय—रहस्यात्मक #पुराण है। यह #भगवत्स्वरूप का अनुभव कराने वाला और समस्त #वेदों का सार है।
परन्तु जिसका स्वभाव रजोगुणी अथवा तमोगुणी है, वे #धन, ऐश्वर्य और सन्तान की कामना से #भूत, पितर और #प्रजापतियों की उपासना करते हैं; क्योंकि इन लोगों का स्वभाव उन (भूतादि) – से मिलता-जुलता होता है । #वेदों का तात्पर्य #श्रीकृष्ण में ही है। यज्ञों के उद्देश्य श्रीकृष्ण ही हैं। योग श्रीकृष्ण के लिये ही किये जाते हैं और समस्त कर्मों की #परिसमाप्ति भी श्रीकृष्ण में ही है ।भगवान ही इस सूक्ष्म भूत—#तन्मात्रा, इन्द्रिय तथा अन्तःकरण आदि गुणों के विकार भूत भावों के द्वारा नाना प्रकार की #योनियों का निर्माण करते हैं और उनमें भिन्न-भिन्न जीवों के रूप में प्रवेश करके उन-उन योनियों के अनुरूप विषयों का उपभोग करते-कराते हैं । वे ही सम्पूर्ण लोगों की रचना करते हैं और देवता, पशु-पक्षी, मनुष्य आदि योनियों में #लीलावतार ग्रहण करके सत्वगुण के द्वारा जीवों का पालन-पोषण करते हैं ।
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भागवत महापुराण प्रथम स्कन्ध अध्याय 3 भगवान के 24 अवतारों का वर्णन की कथा सुनिये

#श्रीमद्भागवत #महापुराण #प्रथम #स्कन्ध #अध्याय 3 #भगवान के 24 #अवतारों का #वर्णन की #कथा #सुनिये by Pradeep Pandey 9871030464 https://youtu.be/StlvDybddhE https://goo.gl/maps/NDYdYv1RBut
#भगवान् का वह रूप हजारों पैर, जाँघें, भुजाएँ और मुखों के कारण अत्यन्त विलक्षण है; उसमें #सहस्रों सिर, हजारों कान, हजारों आँखें और हजारों नासिकाएँ हैं । #हजारों मुकुट, वस्त्र और कुण्डल आदि #आभूषणों से वह उल्लसित रहता है | भगवान् का यही #पुरुषरूप, जिसे नारायण कहते हैं, अनेक #अवतारों का अक्षय कोष है—इसीसे सारे #अवतार प्रकट होते हैं । इस रूप के छोटे-से-छोटे अंश से देवता, पशु-पक्षी और #मनुष्यादि योनियों की सृष्टि होती है ॥
भगवान् #वेदव्यास ने यह वेदों के समान भगवच्चरित्र से परिपूर्ण #भागवत नाम का पुराण बनाया है | उन्होंने इस श्लाघनीय, #कल्याणकारी और महान् पुराण को लोगों के परम कल्याण के लिये अपने #आत्मज्ञानि-शिरोमणि पुत्र को ग्रहण कराया | इसमें सारे #वेद और इतिहास का सार-सार संग्रह किया गया है । शुकदेवजी ने राजा #परीक्षित को यह सुनाया | उस समय वे परमर्षियों से घिरे हुए आमरण अनशन का व्रत लेकर #गङ्गातट पर बैठे हुए थे । भगवान् #श्रीकृष्ण जब धर्म, ज्ञान आदि के साथ अपने #परमधाम को पधार गये, तब इस कलियुग में जो लोग अज्ञानरूपी अंधकार से अंधे हो रहे हैं, उनके लिये यह पुराणरूपी सूर्य इस समय प्रकट हुआ है । #शौनकादि ऋषियों ! जब महातेजस्वी #श्रीशुकदेवजी महाराज वहाँ इस पुराण की #कथा कह रहे थे, तब मैं भी वहाँ बैठा था । वहीं मैंने उनकी कृपापूर्ण #अनुमति से इसका अध्ययन किया । मेरा जैसा अध्ययन है और मेरी बुद्धि ने जितना जिस प्रकार इसको ग्रहण किया है, उसीके अनुसार इसे में आपलोगों को #सुनाऊँगा
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