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गरुण पुराण की कथा सुनने और सुनाने वाले को भगवान विष्णु क्या कहते है जानिए, Garun Puran Importance by Pandit Pradeep Pandey 9871030464

गरुण पुराण की कथा सुनने और सुनाने वाले को भगवान विष्णु क्या कहते है जानिए, Garun Pran Ki Katha Importance after Death by Pandit Pradeep Pandey 9871030464 https://youtu.be/RLVA9FZmi3M #गरुण #पुराण की #कथा #सुनने और #सुनाने वाले को #भगवान #विष्णु क्या कहते है #जानिए , #Garun #Puran Ki #Katha #importance after #Death #गरुड़ को #कश्यप #ऋषि का #पुत्र और #भगवान #विष्णु का #वाहन माना जाता है. एक बार गरुड़ ने भगवान #विष्णु से, प्राणियों की #मृत्यु, #यमलोक #यात्रा, #नरक-योनियों तथा #सद्गति के बारे में अनेक #गूढ़ और #रहस्ययुक्त #प्रश्न पूछे. उस समय #भगवान विष्णु ने गरुड़ की #जिज्ञासा #शांत करते हुये इन #प्रश्नों का #उत्तर दिया. गरुड़ के #प्रश्न और भगवान विष्णु के #उत्तर, इसी गरुड़ #पुराण में #संकलित किए गए हैं. #सनातन #धर्म में #मृत्यु के बाद गरुड़ #पुराण सुनने का #विधान है. इस पुराण के #उत्तर खंड में #प्रकल्प का #वर्णन है, इसका #श्रवण या #मनन करने से #सद्गति की #प्राप्ति होती है. #पुराणों के #अनुसार यह कहा जाता है कि जो #व्यक्ति इस #जीवन में अच्छे #कर्म करता है उसे #मरने के बाद #स्वर्ग की प्राप्ति होती है वहीं वे लोग जो #गल्त काम करते हैं और पूरी जिन्दगी #बुराई का ही साथ देते हैं वह #नर्क जाते हैं। गरुण पुराण दो भागों में #विभाजित है, पहले भाग में #श्रीहरी के स्वरूपों का #वर्णन है और दूसरे में #जीवन-मरण को बताया गया है। इस #भाग में शरीर को #त्यागने के बाद #आत्मा के साथ क्या होता है इसका भी #जिक्र है।#श्राद्ध #जन्म, #मृत्यु, #श्राद्ध आदि के महत्व को भी इसी #भाग में दिखाया गया है। #गरुड़ पुराण #सम्पूर्ण कथा, गरुड़ #पुराण #अध्याय, गरुड़ पुराण #सुनाइए, गरुड़ #पुराण #रहस्य, गरुड़ पुराण #अध्याय , गरुड़ #पुराण का नरक #वर्णन, गरुड़ पुराण #वीडियो, गरुड़ पुराण #मृत्यु के बाद, #गरुड़ पुराण , #Garud Puran, Garun #Puran #Pitru #Paksha #Puja, #Garun #Puran Will #Takes #Place #After ,#मौत के बाद #गरुण #पुराण का #पाठ

 

गरुण पुराण सोलह अंतिम अध्याय की कथा, सुनिये मनुष्य के मोक्ष पाने का उपाय, संसार से मुक्ति का उपाय by Pandit Pradeep Pandey 9871030464

गरुण पुराण 16 अंतिम अध्याय की कथा सुनिये मनुष्य के मोक्ष पाने का उपाय संसार से मुक्ति का उपाय by Pandit Pradeep Pandey 9871030464 https://youtu.be/SuZx-OIFYQs #गरुण #पुराण 16 #सोलह #अंतिम #अध्याय की #कथा #सुनिये #मनुष्य के #मोक्ष पाने का #उपाय #संसार से #मुक्ति का उपाय #गरुड़ जी ने कहा – हे #दया #सिन्धो!अज्ञान के कारण #जीव #जन्म-मरणरूपी #संसार चक्र में पड़ता है, यह मैंने सुना। अब मैं #मोक्ष के #सनातन उपाय को सुनना चाहता हूँ। हे #भगवन ! हे #देव #देवेश! हे #शरणागतवत्सल ! सभी प्रकार के दु:खों से मलिन तथा #साररहित इस भयावह संसार में अनेक प्रकार के #शरीर धारण करके अनन्त #जीवराशियाँ उत्पन्न होती हैं और #मरती हैं, उनका कोई अन्त नहीं है। ये सभी सदा #दु:ख से पीड़ित रहते हैं, इन्हें कहीं #सुख नहीं प्राप्त होता। हे #मोक्षेश ! हे #प्रभो ! किस उपाय के करने से इन्हें इस #संसृति-चक्र से #मुक्ति प्राप्त हो सकती है, इसे आप मुझे बताएँ। #श्रीभगवान ने कहा – हे #तार्क्ष्य ! तुम इस विषय में मुझसे जो पूछते हो, मैं बतलाता हूँ ! सुनो – जिसके सुनने मात्र से #मनुष्य संसार से मुक्त हो जाता है। वह #परब्रह्म परमात्मा #निष्कल (कलारहित) #परब्रह्मस्वरूप, #शिवस्वरूप, #सर्वज्ञ, #सर्वेश्वर, #निर्मल तथा अद्वय #द्वैतभावरहित है। वह #परमात्मा स्वत: प्रकाश है, #अनादि, #अनन्त, #निर्विकार, #परात्पर, #निर्गुण और #सत्-चित्-आनन्दस्वरूप है। यह जीव उसी का #अंश है। जैसे #अग्नि से बहुत से #स्फुलिंग अर्थात #चिंगारियाँ निकलती हैं उसी प्रकार #अनादिकालीन #अविद्या से युक्त होने के कारण #अनादि काल से किये जाने वाले #कर्मों के परिणामस्वरुप #देहादि उपाधि को धारण करके जीव #भगवान से पृथक हो गए हैं। वे #जीव प्रत्येक जन्म में #पुण्य और पापरूप #सुख-दु:ख प्रदान करने वाले कर्मों से नियंत्रित होकर तत्तत् #जाति के योग से देह(शरीर), #आयु और #कर्मानुरोधी #भोग प्राप्त करते हैं। हे #खग ! इसके पश्चात भी पुन: वे अत्यन्त #सूक्ष्म #लिंग शरीर प्राप्त करते हैं और यह क्रम #मोक्षपर्यन्त स्थित रहता है। ये #जीव कभी #स्थावर #वृक्ष-लतादि जड़ #योनियों में, पुन: #कृमियोनियों में तदनन्तर #जलचर, #पक्षी और #पशुयोनियों को प्राप्त करते हुए #मनुष्ययोनि प्राप्त करते हैं फिर #धार्मिक #मनुष्य के रूप में और पुन: #देवता तथा #देवयोनि के पश्चात क्रमश: #मोक्ष प्राप्त करने के #अधिकारी होते हैं। #उद्भिज्ज, #स्वेदज और #पिण्डज जरायुज – इन चार प्रकार के शरीरों को #सहस्त्रों बार धारण करके उनसे मुक्त होकर #सुकृतवश पुण्यप्रभाव से जीव #मनुष्य-शरीर प्राप्त करता है और यदि वह #ज्ञानी हो जाए तो #मोक्ष प्राप्त कर लेता है। #गरुड़ पुराण #अध्याय 16, गरुण पुराण #सोलह अध्याय की कथा, गरुड़ #पुराण #सोलहवाँ अध्याय, #Garud puran #chapter 16, गरुड़ #पुराण कथा इन #हिंदी, गरुण पुराण #कथा, गरुड़ #पुराण #अंतिम अध्याय 16, #Garuda Purana #Katha in #Hindi, मनुष्य #शरीर प्राप्त करने की #महिमा, #धर्माचरण ही मुख्य #कर्तव्य, #शरीर और #संसार की# दु:खरूपता तथा #नश्वरता, #मोक्ष-धर्म-निरूपण, मोक्ष के #सनातन उपाय, #सुनिये #मनुष्य के #मोक्ष #पाने का उपाय, #संसार से #मुक्ति का #उपाय

गरुण पुराण पंद्रह अध्याय की कथा सुनिए किस दिन सम्बन्ध बनाने (सम्भोग करने) से पुत्र की प्राप्ति होगी गर्भाधान के नियम by Pandit Pradeep Pandey 9871030464

गरुण पुराण पंद्रह अध्याय की कथा सुनिए किस दिन सम्बन्ध बनाने (सम्भोग करने) से पुत्र की प्राप्ति होगी गर्भाधान के नियम by Pandit Pradeep Pandey 9871030464 https://youtu.be/P_MPm6CudyA #गरुण #पुराण #पंद्रह #अध्याय की #कथा #सुनिए #किस #दिन #सम्बन्ध बनाने से #पुत्र की #प्राप्ति होगी #गर्भाधान के #नियम #गरुड़ जी ने कहा – #धर्मात्मा व्यक्ति #स्वर्ग के भोगों को भोगकर पुन: निर्मल कुल में #उत्पन्न होता है इसलिए माता के #गर्भ में उसकी उत्पत्ति #कैसे होती है, इस विषय में बताइए। हे #करुणानिधे ! #पुण्यात्मा पुरुष इस देह के विषय में जिस प्रकार #विचार करता है, वह मैं सुनना चाहता हूँ, मुझे बताइए। #श्रीभगवान ने कहा – हे #तार्क्ष्य ! तुमने ठीक पूछा है, मैं तुम्हें परम #गोपनीय बात बताता हूँ जिसे जान लेने मात्र से #मनुष्य #सर्वज्ञ हो जाता है। पहले मैं तुम्हें शरीर के #पारमार्थिक स्वरूप के विषय में बतलाता हूँ, जो #ब्रह्माण्ड के गुणों से संपन्न है और #योगियों के द्वारा करने योग्य है। इस #पारमार्थिक शरीर में जिस प्रकार #योगी लोग #षट्चक्र का #चिन्तन करते हैं, वह सब मुझसे सुनो। चौथे दिन #वस्त्रों सहित #स्नान करने के #अनन्तर वह #नारी #शुद्ध होती है तथा एक सप्ताह के बाद #पितरों एवं #देवताओं के #पूजन, #अर्चन तथा व्रत करने के योग्य होती है। एक #सप्ताह के मध्य में जो #गर्भ धारण होता है, उससे, #मलिन #वृत्तिवाली #संतान का #जन्म होता है। प्राय: #ऋतुकाल के #आठवें दिन #गर्भाधान से #पुत्र की उत्पत्ति होती है। ऋतुकाल के #अनन्तर युग्म (सम) रात्रियों में #गर्भाधान होने से पुत्र और अयुग्म (विषम) रात्रियों में #गर्भाधान से #कन्या की उत्पत्ति होती है, इसलिए पूर्व की #सात #रात्रियों को छोड़कर युग्म की #रात्रियों में ही #समागम करना चाहिए। #स्त्रियों के #रजोदर्शन से सामान्यत: #सोलह रात्रियों तक #ऋतुकाल बताया गया है। #चौदहवीं रात्रि को #गर्भाधान होने पर #गुणवान, #भाग्यवान और #धार्मिक #पुत्र की उत्पत्ति होती है। प्राकृत #जीवों (सामान्य मनुष्यों) को #गर्भाधान के #निमित्त उस रात्रि में #गर्भाधान का अवसर प्राप्त नहीं होता। #पाँचवें दिन #स्त्री को #मधुर भोजन करना चाहिए। #कड़ुआ, #खारा, #तीखा तथा #उष्ण भोजन से दूर रहना चाहिए तब स्त्री का वह क्षेत्र (गर्भाशय) #औषधि का पात्र हो जाता है और उसमें #संस्थापित #बीज अमृत की तरह #सुरक्षित रहता है। उस #औषधि क्षेत्र में #बीजवपन (गर्भाधान) करने वाला #स्वामी अच्छे फल को प्राप्त करता है। #ताम्बूल खाकर, #पुष्प और #श्रीखण्ड से युक्त होकर तथा #पवित्र वस्त्र धारण करके मन में #धार्मिक भावों को रखकर #पुरुष को सुन्दर #शय्या पर #संवास करना चाहिए। #गर्भाधान के समय #पुरुष की #मनोवृत्ति जिस प्रकार की होती है, उसी प्रकार के #स्वभाव वाला #जीव #गर्भ में प्रविष्ट होता है। #बीज का स्वरूप धारण करके #चैतन्यांश पुरुष के #शुक्र में स्थित रहता है। #पुरुष की काम #वासना, #चित्तवृत्ति तथा #शुक्र जब एकत्व को प्राप्र होते हैं, तब #स्त्री के #गर्भाशय में #पुरुष द्रवित होता है। स्त्री के गर्भाशय में #शुक्र और #शोणित के संयोग से #पिण्ड की #उत्पत्ति होती है। #गरुड़ पुराण अध्याय 15, #Garuda Purana #Katha in #Hindi, गरुण #पुराण कथा, गरुड़ #पुराण #पंद्रहवाँ अध्याय, Garud #puran #chapter 15, #धर्मात्मा जन का #दिव्यलोकों का सुख भोगकर उत्तम कुल में #जन्म लेना, #शरीर के #व्यावहारिक तथा #पारमार्थिक दो रूपों का #वर्णन, #अजपाजप की विधि, #भगवत्प्राप्ति के साधनों में #भक्ति योग की #प्रधानता, किस #दिन सम्बन्ध बनाने से #पुत्र पैदा होता है, किस #दिन सम्बन्ध बनाने से #पुत्री पैदा होती है, किस दिन #गर्भाधान से #पुत्र की #उत्पत्ति होती है, #माता के #गर्भ से #शिशु की #उत्पत्ति कैसे होती है, #जानिए किस #दिन #सम्भोग करने से #पुत्र #पैदा होता है

गरुण पुराण चौदह अध्याय की कथा, जानिए यमलोक कितना बड़ा है, किसके द्वारा बनाया गया है, सभा कैसी है by Pandit Pradeep Pandey 9871030464

गरुण पुराण चौदह अध्याय की कथा जानिए यमलोक कितना बड़ा है कैसा है किसके द्वारा बनाया गया है सभा कैसी है by Pandit Pradeep Pandey 9871030464 https://youtu.be/nb9q6tKvNUo #गरुण #पुराण #चौदह #अध्याय की #कथा जानिए #यमलोक कितना #बड़ा है #कैसा है #किसके द्वारा #बनाया गया है #सभा #कैसी है #garun #puran #chaudah #adyay ki #katha #गरुड़ #उवाच #गरुड़ जी ने कहा – हे #दयानिधे ! #यमलोक कितना #बड़ा है? #कैसा है? #किसके द्वारा #बनाया हुआ है? वहाँ की #सभा कैसी है और उस सभा में #धर्मराज किनके साथ बैठते हैं? हे दयानिधे ! जिन #धर्मों का आचरण करने के कारण #धार्मिक पुरुष जिन धर्म मार्गों से धर्मराज के #भवन में जाते हैं, उन #धर्मों तथा #मार्गों के विषय में भी आप मुझे #बतलाइए ! #श्रीभगवानुवाच #श्रीभगवान ने कहा – हे #गरुड़ ! धर्मराज का जो नगर #नारदादि #मुनियों के लिए भी #अगम्य है उसके विषय में बतलाता हूँ, सुनो ! उस #दिव्य धर्म नगर को #महापुण्य से ही प्राप्त किया जा सकता है। #दक्षिण #दिशा और #नैऋत्य #कोण के मध्य में #वैवस्वत, #यम का जो नगर है, वह #संपूर्ण नगर #वज्र का बना हुआ है, #दिव्य है और #असुरों तथा #देवताओं से #अभेद्य है। गरुड़ पुराण #अध्याय 14 की #कथा सुनिये, #Garuda Purana Katha in #Hindi, #गरुण पुराण #कथा, गरुड़ #पुराण #चौदहवाँ अध्याय, गरुड़ पुराण चौदहवाँ #अध्याय, गरुड़ #पुराण अध्याय 14 #यमलोक, यम #सभा चित्रगुप्त, garun puran #chapter chaudah, #मनुष्य की #मुक्ति का मार्ग, #यमलोक कितना #बड़ा है, यमलोक #कैसा है, यमलोक #किसके द्वारा #बनाया हुआ है, #यमलोक की #सभा कैसी है, यमलोक की सभा में #धर्मराज किनके साथ बैठते हैं, यमलोक एवं #यमसभा का #वर्णन, #चित्रगुप्त आदि के #भवनों का #परिचय, #धर्मराज नगर के चार #द्वार,#पुण्यात्माओं का #धर्म सभा में #प्रवेश

गरुण पुराण चौदह अध्याय की कथा, जानिए यमलोक कितना बड़ा है, किसके द्वारा बनाया गया है,सभा कैसी है by Pandit Pradeep Pandey 9871030464

गरुण पुराण चौदह अध्याय की कथा जानिए यमलोक कितना बड़ा है कैसा है किसके द्वारा बनाया गया है सभा कैसी है by Pandit Pradeep Pandey 9871030464 https://youtu.be/nb9q6tKvNUo #गरुण #पुराण #चौदह #अध्याय की #कथा #जानिए #यमलोक #कितना #बड़ा है #कैसा है #किसके द्वारा बनाया गया है #सभा #कैसी है #गरुड़ #उवाच #गरुड़ जी ने कहा – हे #दयानिधे ! #यमलोक कितना बड़ा है? कैसा है? किसके द्वारा बनाया हुआ है? वहाँ की #सभा कैसी है और उस सभा में #धर्मराज किनके साथ बैठते हैं? हे #दयानिधे ! जिन धर्मों का #आचरण करने के कारण #धार्मिक पुरुष जिन #धर्म मार्गों से धर्मराज के #भवन में जाते हैं, उन #धर्मों तथा #मार्गों के #विषय में भी आप मुझे #बतलाइए ! #श्रीभगवानुवाच #श्रीभगवान ने कहा – हे #गरुड़ ! #धर्मराज का जो नगर #नारदादि #मुनियों के लिए भी #अगम्य है उसके विषय में बतलाता हूँ, सुनो ! उस #दिव्य #धर्म नगर को #महापुण्य से ही प्राप्त किया जा सकता है। #दक्षिण #दिशा और #नैऋत्य कोण के मध्य में #वैवस्वत, #यम का जो नगर है, वह #संपूर्ण नगर #वज्र का बना हुआ है, #दिव्य है और #असुरों तथा #देवताओं से #अभेद्य है। #गरुड़ पुराण #अध्याय 14 की कथा #सुनिये, #Garuda #Puran Katha in #Hindi, गरुण #पुराण #कथा, #गरुड़ पुराण #चौदहवाँ अध्याय, गरुड़ पुराण चौदहवाँ #अध्याय, गरुड़ #पुराण अध्याय 14 #यमलोक, यम #सभा चित्रगुप्त, #garun puran #chapter #chaudah, मनुष्य की #मुक्ति का #मार्ग, #यमलोक कितना #बड़ा है, #यमलोक #कैसा है, यमलोक #किसके #द्वारा बनाया हुआ है, #यमलोक की #सभा कैसी है, यमलोक की सभा में #धर्मराज किनके साथ बैठते हैं, #यमलोक एवं #यमसभा का वर्णन, #चित्रगुप्त आदि के #भवनों का #परिचय, #धर्मराज नगर के चार द्वार, #पुण्यात्माओं का #धर्म सभा में #प्रवेश

 

हनुमान चालीसा पाठ, Hanuman Chalisa Path by Pandit Pradeep Pandey 9871030464

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