सौम्य प्रदोष व्रत कथा, शिव त्रयोदशी व्रत कथा, पूजन और विधि, Pradosh Katha by Pandit Pradeep Pandey 9871030464

शास्त्रों के अनुसार #प्रदोष #व्रत #कथा करने से #व्यक्ति के जीवन के सारे #कष्ट दूर हो जाते हैं. इस #व्रत को करने से #भगवान #शिव की #कृपा सदैव आप पर बनी रहती है. जो #प्रदोष #व्रत #सोमवार के दिन पड़ता है वो #सोम #प्रदोष #व्रत कहलाता है। इस दिन #व्रत रखने से भक्तों के अन्दर #सकारात्मक विचार आते है और वह अपने जीवन में #सफलता प्राप्त करते है।

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एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने के नियम, लाभ एवं मन्त्र, importance of One Faced Rudraksha, by Pandit Pradeep Pandey 9810196053

#एकमुखी #रुद्राक्ष का आकार #ओंकार होता है। इसमें #साक्षात #भगवान #शिव का वास होता है। #मान्यता है कि एक मुखी #रुद्राक्ष (Ek Mukhi Rudraksha) धारण करने से #भगवान #शिव की #शक्तियां प्राप्त होती है। यह एक दुर्लभ #रुद्राक्ष है जो किस्मत वालों को ही मिलता है। #एकमुखी रुद्राक्ष के #लाभ इस #एकमुखी #रुद्राक्ष के प्रभाव में #मनुष्य अपनी #इंद्रियों को वश में कर #ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति की ओर अग्रसर होता है। सबसे बड़ी बात ये है कि इससे उच्च #रक्तचाप की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। #उच्च रक्तचाप की समस्या को नियंत्रित करने का इससे आसान उपाय और कोई नहीं हो सकता। इसे #धारण करने से मनुष्य की उसके शत्रुओं से रक्षा होती है। यहां तक कि धन प्राप्ति में भी #एकमुखी #रुद्राक्ष सहायक होता है। एक #मुखी #रुद्राक्ष #धारण करने से व्यक्ति गंभीर पापों से भी मुक्ति पा सकता है। एक #मुखी रुद्राक्ष की #प्रयोग विधि एक मुखी रुद्राक्ष को #धारण करने का मंत्र “ॐ ह्रीं नमः” है और शिव का पंचाक्षर बीज मंत्र “ॐ नमः #शिवाय” है। दोनों में से किसी भी एक #मंत्र का उच्चारण कर #एकमुखी रुद्राक्ष को #धारण किया जा सकता है।

6 मुखी रूद्राक्ष धारण करने से लाभ, नियम तथा मंत्र, importance 6 faced Rudraksha, worship by Pandit Pradeep Pandey 9810196053

#छहमुखी #रुद्राक्ष बेहद अहम माना जाता है। इस #रुद्राक्ष को भगवान #कार्तिकेय का रूप भी माना गया है। 6 #मुखी रुद्राक्ष के फायदे (Benefits of #Chhaha #Mukhi #Rudraksha in Hindi) * #वृषभ और #तुला राशि के #जातकों को छह #मुखी रुद्राक्ष धारण करना शुभ माना गया है। * #दांपत्य जीवन में #प्रेम की कमी, तलाक से बचने, प्रेम #विवाह में सफल होने, संगीत कला में माहिर होने आदि के लिए यह #रुद्राक्ष बेहद अहम माना गया है। * #दाहिनी #बाँह में इस रुद्राक्ष को धारण करने वाला #मनुष्य #ब्रह्महत्या जैसे जघन्य #पापों से भी मुक्त हो जाता है।छ: #मुखी #रुद्राक्ष का मंत्र (Mantra of #Chah Mukhi #Rudraksha) * #षष्ठ #मुखी रुद्राक्ष को धारण करते समय “ऊँ ह्रीं हुं नम:” (Om Hreem Hum Namah) #मंत्र का लगातार उच्चारण करते रहें।

11 मुखी रूद्राक्ष धारण करने का लाभ, नियम तथा मंत्र, eleven faced Rudraksha benefits, by Pandit Pradeep Pandey 9810196053

11 #ग्यारह #मुखी #रुद्राक्ष साक्षात रूद्र के सामान माना जाता है. इसे एक #मुखी रुद्राक्ष का #प्रतिरूप भी कहा जाता है. यह #एकादश मुखी #रुद्राक्ष सुख #समृद्धि दायक होता है. इसे #धारण करने से सभी कार्यो में #सिद्धि प्राप्ति होती है. #ग्यारह मुखी रुद्राक्ष #आध्यात्मिक प्रभाव से युक्त माना गया है. इसे #ग्यारह #रुद्रों एवं #भगवान #शिव के #ग्यारहवें अवतार #हनुमान जी का प्रतीक भी कहते हैं. #ग्यारह #मुखी #रुद्राक्ष के लाभ #ग्यारह #मुखी #रुद्राक्ष को धारण करने और नियमित इससे #मंत्र का जाप करने से #अश्वमेघ #यज्ञ जितना फल प्राप्त होता है। #ग्यारह #मुखी रुद्राक्ष से सबसे ज्याद #व्यापारियों को लाभ मिलता है क्योंकि इससे #आय के स्रोत खुलते हैं और #व्यापार में वृद्धि होती है एवं नए अवसर प्राप्त होते हैं। इस ग्यारह #मुखी रुद्राक्ष को धारण करने वाले व्यक्ति को #राजनीति, #कूटनीति और हर क्षेत्र में #विजय हासिल होती है। #संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं या #पति की तबियत खराब रहती है तो #ग्यारह मुखी #रुद्राक्ष धारण करें।

गौरी शंकर रुद्राक्ष दांपत्य जीवन, शादी विवाह में परेशानी हेतु धारण करे, wear for happy marriage life by Pandit Pradeep Pandey 9871030464

#गौरी #शंकर #रुद्राक्ष #दांपत्य #जीवन, #शादी #विवाह में #परेशानी दूर करने हेतु #धारण करे, #wear for #happy #marriage #life #गौरीशंकर रूद्राक्ष पहनने से #रिश्तों में मज़बूती आती है. यह #परिवार के रिश्तों को बढ़ाता है. उन सभी के लिए जो एक सुखी #विवाहित जीवन और परिवार में सुख और शांति का #वास चाहते हैं उन सभी के लिए यह अमूल्य #रुद्राक्ष है. जिन लोगों के #विवाह में देरी हो रही हो या कोई #बाधा आ रही है तो उन्हें #गौरी रुद्राक्ष #धारण करने से अवश्य ही फायदा पहुंचता है। #गृहस्थ सुख के लिए गौरी #शंकर रुद्राक्ष अति शुभ माना जाता है। भगवान शिव और मां #पार्वती एक सुखी गृहस्थ जीवन का प्रतीक हैं और इसीलिए जो भी व्यक्ति इस रुद्राक्ष को धारण् करता है उसका #वैवाहिक जीवन #सुख से भर जाता है।

श्राद्ध या तर्पण करना, पितरो को प्रसन्न करने का आसान उपाय, satisfied your family death person by Pandit Pradeep Pandey 9871030464

#शास्त्रों में बताया गया है कि #गया, #बद्रीनाथ के #ब्रह्मकपाल, #गोदावरी तट एवं #प्रयाग में #श्राद्घ और #तर्पण करने से पितर जल्दी खुश हो जाते हैं और उन्हें मुक्ति मिल जाती है। लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति #श्राद्घ पक्ष में इन तीर्थ स्थानों पर जाकर #श्राद्घ #तर्पण कर सके। इसलिए #शास्त्रों में कुछ ऐसे नियम बताए गए हैं कि जिससे घर पर रह कर ही #श्राद्घ पक्ष में #पितरों को खुश किया जा सकता है। #श्राद्ध की सरल विधि को अपनाएं – – सुबह #उठकर स्नान कर #देव #स्थान#पितृ स्थान को गाय के #गोबर से लीपकर व गंगाजल से पवित्र करें। – घर #आंगन में रंगोली बनाएं। – #महिलाएं शुद्ध होकर #पितरों के लिए भोजन बनाएं। – #श्राद्ध का अधिकारी श्रेष्ठ #ब्राह्मण (या कुल के #अधिकारी जैसे #दामाद, #भतीजा आदि) को #न्यौता देकर बुलाएं। – #ब्राह्मण से #पितरों की पूजा एवं #तर्पण आदि कराएं। – #पितरों के निमित्त #अग्नि में गाय का #दूध, दही, #घी एवं खीर अर्पित करें। #गाय, #कुत्ता, #कौआ#अतिथि के लिए #भोजन से चार #ग्रास निकालें। – #ब्राह्मण को आदरपूर्वक #भोजन कराएं, #मुखशुद्धि, #वस्त्र, #दक्षिणा आदि से सम्मान करें। – #ब्राह्मण #स्वस्तिवाचन तथा #वैदिक पाठ करें एवं गृहस्थ एवं पितर के प्रति #शुभकामनाएं व्यक्त करें। https://youtu.be/4JY_PCbtcBQ

 

पितृ दोष के लक्षण, कारण एवं निवारण उपाय, पितृ गण में कौन है , who is pitra, by Pandit Pradeep Pandey 9871030464

#पितृ #दोष के #लक्षण #कारण एवं #निवारण #उपाय #पितृ #गण में #कौन है? #पितृ #दोष की #शान्ति #पाठ जब #परिवार के किसी पूर्वज की #मृत्यु के पश्चात उसका भली प्रकार से अंतिम #संस्कार संपन्न ना किया जाए, या #जीवित #अवस्था में उनकी कोई इच्छा अधूरी रह गई हो तो उनकी #आत्मा अपने घर और आगामी #पीढ़ी के लोगों के बीच ही भटकती रहती है। मृत #पूर्वजों की अतृप्त #आत्मा ही परिवार के लोगों को #कष्ट देकर अपनी #इच्छा पूरी करने के लिए दबाव डालती है और यह कष्ट #पितृदोष के रूप में #जातक की #कुंडली में झलकता है। हमारे ये ही पूर्वज #सूक्ष्म व्यापक शरीर से अपने #परिवार को जब देखते हैं ,और महसूस करते हैं कि हमारे परिवार के लोग ना तो हमारे प्रति #श्रद्धा रखते हैं और न ही इन्हें कोई प्यार या स्नेह है और ना ही किसी भी #अवसर पर ये हमको याद करते हैं,ना ही अपने #ऋण चुकाने का प्रयास ही करते हैं तो ये #आत्माएं दुखी होकर अपने #वंशजों को श्राप दे देती हैं,जिसे #पितृ– दोष कहा जाता है। हमारे ऊपर #मुख्य रूप से ५ ऋण होते हैं जिनका #कर्म न करने(ऋण न चुकाने पर ) हमें निश्चित रूप से #श्राप मिलता है ,ये ऋण हैं : #मातृ ऋण ,#पितृ ऋण ,#मनुष्य ऋण ,#देव ऋण और #ऋषि ऋण। पितृ #दोष के कारण व्यक्ति को बहुत से कष्ट उठाने पड़ सकते हैं, जिनमें #विवाह ना हो पाने की समस्या, #विवाहित जीवन में #कलह रहना, परीक्षा में बार-बार असफल होना, #नशे का आदि हो जाना, नौकरी का ना लगना या छूट जाना, #गर्भपात या #गर्भधारण की समस्या, बच्चे की #अकाल #मृत्यु हो जाना या फिर #मंदबुद्धि बच्चे का जन्म होना, #निर्णय ना ले पाना, अत्याधिक #क्रोधी होना। #Pitra #Dosh #Nivaran #Puja, What is Pitra Dosh #Shanti Puja, #पितृ दोष के लक्षण #कारण एवं #निवारण #उपाय, #पितृ #गण में #कौन है, #पितृदोष कारण #लक्षण एवं #निदान, #प्रेत योनि अथवा #पितृदोष, पितृदोष का #भयानक असर #जानिये लक्षण