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पूजा पाठ, मंत्र और हवन, पूजा करने के नियम, मंत्र जप के नियम, पूजा करने की विधि

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पूजा करने के महत्वपूर्ण नियम

1. शिवजीगणेशजी और भैरवजी को तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए.
2. तुलसी का पत्ता बिना स्नान किए नहीं तोड़ना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बिना नहाए ही तुलसी के पत्तों को तोड़ता है तो पूजन में ऐसे पत्ते भगवान द्वारा स्वीकार नहीं किए जाते हैं.
3. तुलसी के पत्तों को 11 दिनों तक बासी नहीं माना जाता है. इसकी पत्तियों पर हर रोज जल छिड़कर पुन: भगवान को अर्पित किया जा सकता है.
4. रविवारएकादशीद्वादशीसंक्रान्ति तथा संध्या काल में तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए.
5. सूर्य देव को शंख के जल से अर्घ्य नहीं देना चाहिए.
6. दूर्वा घास रविवार को नहीं तोड़नी चाहिए.
7. बुधवार और रविवार को पीपल के वृक्ष में जल अर्पित नहीं करना चाहिए.
8. प्लास्टिक की बोतल में या किसी अपवित्र धातु के बर्तन में गंगाजल नहीं रखना चाहिए. अपवित्र धातु जैसे एल्युमिनियम और लोहे से बने बर्तन. गंगाजल तांबे के बर्तन में रखना शुभ रहता है.
9. केतकी का फूल शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए.
10. किसी भी पूजा में मनोकामना की सफलता के लिए दक्षिणा अवश्य चढ़ानी चाहिए.
11. मां लक्ष्मी को विशेष रूप से कमल का फूल अर्पित किया जाता है. इस फूल को पांच दिनों तक जल छिड़क कर पुन: चढ़ा सकते हैं.
12. घर के मंदिर में सुबह एवं शाम को दीपक अवश्य जलाएं. एक दीपक घी का और एक दीपक तेल का जलाना चाहिए.
13. सूर्यगणेशदुर्गाशिव और विष्णु, ये पंचदेव कहलाते हैं, इनकी पूजा सभी कार्यों में अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए. प्रतिदिन पूजन करते समय इन पंचदेव का ध्यान करना चाहिए. इससे लक्ष्मी कृपा और समृद्धि प्राप्त होती है.

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श्री यंत्र पूजा, क्रिस्टल श्री यंत्र, स्फटिक श्री यंत्र स्थापना, श्री यंत्र मंत्र, श्री यंत्र दैनिक पूजन विधि

स्फटिक श्रीयंत्र सबसे उपयुक्त यंत्र में से एक है, महत्वपूर्ण और शक्तिशाली, न केवल लाभ को अधिकतम करने के लिए, बल्कि लगभग सभी के लिए भी फायदेमंद है। स्फटिक श्री यंत्र के नाम से जाने जाने वाले क्रिस्टल को मनशरीर और आत्मा के लिएअसाधारण चिकित्साऊर्जा कहा जाता है। यह सर्वोच्च ऊर्जा का स्रोत माना जाता है और ऊर्जा तरंगों और किरणों के रूप मेंतत्व का एक और रूप है। क्रिस्टल में सकारात्मक सकारात्मक कंपन हैं, जो ऊर्जा देता है, आपके भावनात्मक जीवन को फिर से जीवंत करता है और स्पष्टता देता है और आपको अधिक सहज ज्ञान युक्त बनाता है। क्रिस्टल श्री यंत्र की सकारात्मक कंपनेंमानसिक संतुलन और शांति प्रदान करती हैं। यह एक बहुत शक्तिशाली यंत्र है

स्फटिक श्री यंत्र निश्चित रूप से हमारे जीवन में सभी समस्याओं और नकारात्मकता का उत्तर है। जो कोई भी क्रिस्टल श्री श्री यंत्र का उपयोग करता है वह बहुत अधिक समृद्धिशांति और सामंजस्य प्राप्त करता है क्रिस्टल श्री यंत्र हमारे जीवन में सभीबाधाओं को तोड़ने में मदद करता है इससे हमें अनिश्चित काल तक और आसानी से विकास की सीमाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है – दोनों आध्यात्मिक और भौतिक रूप से। हमारे चारों ओर नकारात्मक ऊर्जा अधिक या कम है यहनकारात्मक ऊर्जा अधिक सफलतासमृद्धिशांति और सामंजस्य को प्राप्त करने के हमारे रास्ते में है|

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धन लक्ष्मी यंत्र, श्री धनलक्ष्मी यंत्र, महा धन लक्ष्मी यंत्र, धन लक्ष्मी यंत्र, श्री लक्ष्मी कुबेर धन वर्षा यन्त्र , धन लक्ष्मी प्राप्ति के टोटके

धन लक्ष्मी यंत्र का उपयोग करने के तरीके महा धन लक्ष्मी यंत्र जीवन में समृद्धि और आराम के लिए एक अनुकूल यंत्र है,धन लक्ष्मी यंत्रधन लक्ष्मी प्राप्ति के टोटकेलक्ष्मी प्राप्ति मन्त्रलक्ष्मी प्राप्ति साधना मुहूर्त आदि की चर्चा की गई है।
धन या व्यापार से संबंधीत लेन-देन के खाते पर या पत्र व्यवहार करते समय हल्दी या केशर लगायें। गल्ले में, पैसे के लेन-देन से संबंधित, चैक बुक-पासबुक, पूंजी निवेश से संबंधित कागजात इत्यादि श्री यंत्र के साथ में रखें।देवी लक्ष्मी इस रात अपनी बहन दरिद्रा के साथ भू-लोक की सैर पर आती हैं। जिस घर में साफ-सफाई और स्वच्छता रहती है, वहाँ माँ लक्ष्मी अपने कदम रखती हैं और जिस घर में ऐसा नहीं होता वहां दरिद्रा अपना डेरा जमा लेती है।
लक्ष्मी के साथ एकदंत मंगलमूर्ति गणपति की पूजा की जाती है। पूजास्थल पर गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर के पीछे शुभ और लाभ लिखा जाता है व इनके बीच में स्वस्तिक का चिन्ह बनाया जाता है। लक्ष्मी जीकी पूजा से पहले भगवान गणेश की फूल, अक्षत, कुंकू, रोली, दूब, पान, सुपारी और मोदक मिष्ठान से पूजा की जाती है फिर देवी लक्ष्मी की पूजा भी इस प्रकार की जाती है।
लक्ष्मी मंत्र की माला की जाए तो वैभव प्राप्त होता है। वास्तु ग्रंथों में लक्ष्मी, यश-कीर्ति की प्राप्ति और अलक्ष्मी के नाश के उपाय के रूप में कई उपाय मिलते हैं। लक्ष्मी, गायत्री मंत्र का निरंतर जाप भी इष्टप्रद है।
लक्ष्मी मंत्र-‘महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्।’
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पंचमुखी हनुमान कवच, पन्च्मुखी हनुमान कवच, ,हनुमान कवच की पूजा विधि, पंचमुखी हनुमान कवच

पंचमुखी हनुमान कवच को घर या दुकान के मुख्य द्वार पर लगा दें, संकटों से मुक्ति मिलेगी। इस प्रयोग से कर्मचारियों की कार्य क्षमता में वृद्धि होती है और स्थायित्व भी आ जाता है।
इस यंत्र के दर्शन पूजन से अतुल समृद्धिवैभवयशविजयधन-संपत्ति आदि की प्राप्ति होती है। नित्य पूजन के समय ‘हनुमते नमः’ मंत्र का एक माला जप करें।
पंचमुखी हनुमान कवच आप अपने घर में जरुर स्थापित करे।पंचमुखी हनुमान कवच उपलब्ध है जो की अत्यंत प्रभावशाली है।आज ही मंगवाए।
हनुमत कवच का पाठ प्रभु श्रीराम ने स्वयं रावण से युद्ध करते समय किया था। श्री हनुमान कवच अपने आप में भगवान की शक्ति रखता है जिसके प्रभाव से बुराइयों पर जीत पाई जा सकती है | हनुमान भक्त इस कवच की अशीम शक्ति को जानते है | इस कवच की शक्ति को मन को एकाग्रः करके अशीम साधना से जगाया जा सकता है | यह कहा जाता है की यह महावीर हनुमान का शक्तिग्रह है |
हनुमान कवच से होने वाले लाभ :
इस कवच से भूतप्रेत चांडाल राक्षश व अन्य बुरी आत्मायो से बचाव किया जा सकता है | यह कवच आपको टोनो टोटको से बचाता है और आपकी रक्षा करता है | काला जादू इस पर पूरी तरह पराजित हो जाता है | इस कवच का पूर्ण लाभ से जीवन के सभी शोक मिट जाते है अतः इसे शोकनाशं भी पुकारा जाता है|
हनुमत कवच मूल मंत्र है : ॐ श्री हनुमंते नमः
इस मंत्र का उच्चारण 108 बार रुद्राक्ष की माला के साथ सच्चे मन से करे और यह उपासना संपन्न होने के बाद अपने शोक निवारण के लिए हनुमानजी से विनती करे | इसके बाद हनुमानजी को चमेली का तेल और सिंदूर चढ़ावे | साथ में यदि हनुमानजी को चोला और जनेऊ पहना सके तो और भी उत्तम है |
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हनुमानचालीसा यंत्र, हनुमान चालीसा यंत्र, श्री हनुमान चालीसा यन्त्र, श्री हनुमान दर्शन यन्त्र, सम्पूर्ण हनुमान चालीसा

भगवान हनुमान जी का आशीर्वाद रखने के लिए सरल और आसान तरीका है। इस हनुमान चालीसा यंत्र में छवियाँ स्पष्ट रूप से अंकित है !अगर आप अपने संकटो से छुटकारा पाना चाह रहे है, और आप सुखि जीवन जीना चाहते है तो धारण कीजिये हनुमान चालीसा यन्त्र, स्वयं हनुमान जी आपके संकटो को हरने आ रहे है इस छोटे से आविष्कारी अभिमंत्रित हनुमान चालीसा यन्त्र के माध्यम से आपके घर हमेशा आपके साथ इस यन्त्र के माध्यम से ! श्री हनुमान चालीसा यन्त्र धारण करने से आपके जीवन से सारे कष्टों का अंत होगा और आपका जीवन हनुमान जी के आशीर्वाद से भर उठेगा !
धर्म और विज्ञान के अनुठे संगम से बेल्जियम में अविष्कार हुआ एक ऐसा हनुमान चालीसा यन्त्र जिसमे हनुमान जी के मस्तक पर लगे छोटे से लेन्स में देखने पर आपको पूरी हनुमान चालीसा के साथ साथ हनुमान जी की आरती, लंका दहन, श्री राम मिलाप और हनुमान रक्षक यन्त्र साफ़ – साफ़ और स्पष्ट दिखाई देता है. अब धर्म और विज्ञान ने एक और चमत्कार करते हुवे एक नए हनुमान चालीसा यन्त्र का अविष्कार किया है इस नए यन्त्र में सम्पूर्ण हनुमान चालीसा के साथ हनुमानजी के 8 चमत्कारी स्वरुप भी शामिल है, अब इस यन्त्र में केवल चालीस चोपाई ही नहीं बल्कि हनुमानजी की पूरी आरती भी लिखी हुयी है. बेल्जियम में निर्मित यह लेन्स जो दिखने में तो 1 काली मिर्च के आकर स्वरुप दीखता है लेकिन नैनो ग्राफिक तकनीक से इसके भीतर सम्पूर्ण हनुमान चालीसाहनुमानजी की आरती व उनके 8 स्वरूपों को भी अंकित कर दिया गया हे. वो भी पहले से अधिक विराट साफ़ और स्पष्ट रूप है इस यन्त्र को और अधिक शक्ति शाली बनाने के लिए इसमें लगा दिया गया हे एडवांस नैनो ग्राफिक्स लेन्स. इस लेन्स की वजह से आप पूरी हनुमान चालीसा यन्त्र साफ़ और स्पष्ट रूप से पढ़ पाते है !
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गौरी शंकर रुद्राक्ष, शिव शक्ति रुद्राक्ष, गौरी शंकर रुद्राक्ष की चित्र, असली गौरी शंकर रुद्राक्ष

गौरी शंकर रुद्राक्ष प्राकृतिक रूप से परस्पर जुड़े दो रुद्राक्षों को गौरी -शंकर रुद्राक्ष कहा जाता है । गौरी -शंकर रुद्राक्ष को भगवान शिव और माता गौरी का रूप माना जाता है । इसलिए इसका नाम गौरी शंकर रुद्राक्ष पड़ा है । यह रुद्राक्ष एक मुख वाला तथा चौदह मुख वाले की तरह बहुत ही दुर्लभ और विशिष्ट रुद्राक्ष होता है । इसमें शंकर का वरदान और माँ पार्वती की दिव्य शक्तियाँ निहित होती है । इसको पहनने से भगवान शंकर और माता पार्वती दोनों ही समान रूप से खुश होते हैं और अनेक प्रकार वरदान और शक्तियां धारणकर्ता को प्राप्त होते हैं । माता पार्वती हमेशा ही भगवान शंकरको मनुष्यों को वरदान देने को प्रेरित करती रहती हैं ।

यह रुद्राक्ष मानव को हर तरह के रुद्राक्ष से होने वाले लाभ को अकेले ही दिलवाता है ,जो व्यक्ति एक मुख वाला अथवाचौदह मुख वाला रुद्राक्ष पहनना चाहते हों और पहन नही सकते हों उन्हें गौरी -शंकर रुद्राक्ष जरूर ही धारण करना चाहिए ,क्योंकि एक मुख वाले और चौदह मुख वाले के समान ही यह रुद्राक्ष भी हर तरह की सिद्धियों का दाता है । यह अपने आप में वशिष्ट रुद्राक्ष है ।

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